श्रीश्री बगलामुखी सर्वतन्त्रसाधना ज्योतिष

अशुभ सूर्य विधान

जय माँ

यदि किसी जातक की कुण्डली में सूर्य अशुभ हो तो उसको सूर्य के बीज मंत्र का कम से कम 31,000 की संख्या में जप करना चाहिए। जप प्रारंभ शुक्ल पक्ष में शुभ मुहूर्त में सूर्योदय से प्रारंभ करना चाहिए । जाप करते समय अपने पास ताम्र के पात्र में शुद्ध जल, चावल, लाल चंदन, लाल कनेर का पुष्प गंगाजल व गुड़ डालकर पात्र को लाल वस्त्र व आम के पत्तों से ढक लेना चाहिए साथ ही सूर्य के निमित्त दान वस्तुओं को पास में रख लेना चाहिए।

सूर्य का बीज मंत्र - ॐ हृां हृौं सः सूर्याय

गेहूँ, लालचंदन, गुड़, लालपुष्प, लालवस्त्र, रक्तवर्ण की गाय, सोना, माणिक्य, ताम्रपात्र, नारियल,

यदि प्रथम भाव में सूर्य हो तो जातक साहसी, उदार स्वतंत्र विचारों वाला चौड़े कान व उच्च मस्तक वाला होता है । द्वितीय भाव में सूर्य हो तो मुख रोगी, सम्पत्तिवान, भाग्यवान, झगड़ागू, नेत्र-दंत-कर्ण रोगी होता है । तृतीय भाव में सूर्य हो तो पराक्रमी, प्रतापशाली, कवि, बंधुहीन, लब्ध प्रतिष्ठित, बलवान होता है । चतुर्थभाव में सूर्य हो तो सुन्दर, चिन्ताग्रस्त, कठोर, अपव्ययी, पितृधन नाशक, तेजस्वी, वीर्यवान, मातुल कष्टदायक, श्रीमान, निरोगी होता है । सातवें भाव में सूर्य हो तो स्त्री क्लेष कारक, स्वाभिमानी, कठोर, राज्य से अपमानित, चिंता युक्त होता है । आठवें भाव में सूर्य हो तो पित्तरोगी, चिंतायुक्त, क्रोधी, धनी, सुखी, धैर्यहीन, निर्बुद्धि होता है । नवें भाव में सूर्य हो तो योगी, तपस्वी, सदाचारी नेता, ज्योतिषी, साहसी, भ्रातृ सुख व वाहन सुख से युक्त होता है । दसवें भाव में सूर्य हो तो प्रतापी, व्यवसाय में कुशल, लब्ध प्रतिष्ठित, ऐश्वर्य सम्पन्न होता है । ग्यारहवें भाव में सूर्य हो तो धनी, बलवान, मितभाषी, सुखी, उदर रोगी, अल्प संतान होती है । बारहवें भाव में सूर्य हो तो जातक धनी बलवान, मस्तक रोगी, आलसी, परदेश वासी, मित्र द्वेषी व कमजोर शरीर से युक्त और सम्पन्न होता

यदि सूर्य अशुभ स्थिति में हो तो -

तांबे की अंगुली में माणिक्य या विधिवत तैयार सूर्य यंत्र गले में धारण करें।खाना खाते समय सोने या तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए।108 रविवारों को तांबे के पात्र में लाल चंदन से युक्त जल का अध्र्य देना चाहिए।आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ 108 बार करना चाहिए।40 दिन तक बहते पानी में सूर्य मंत्र बोलते हुए गुड़ या तांबे के सिक्के बहाने चाहि

माणिक्य को कांच के पात्र में रखने पर इसके चारों ओर हल्की किरण दिखाई देती है।गाय के दूध में माणिक्य रखने पर दूध का रंग गुलाबी दिखाई देता है, शुद्ध माणिक्य चिकना, कान्तियुक्त, पानीदार, भारी व कनेर के पुष्प जैसा लालरंग का होता

माणिक्य रत्न को रविपुष्य योग व रविवार को सूर्य की होरा में या उत्तराफाल्गुनी, उत्तराषाढ़, उत्तरा भाद्रपदा नक्षत्र में स्वर्ण या तांबे की अंगुठी में मढ़वाकर अनामिका अंगुली में धारण करना चाहिए, धारण करने के पश्चात गायत्री मंत्र की 3 माला, सूर्य मंत्र की 3 माला व सूर्य के निमित्त दान करना चाहिए

विधि पूर्वक माणिक्य धारण करने से राजकीय क्षेत्रों में प्रतिष्ठा व भाग्य व उन्नति, संतान लाभ, तेजबल हृदय व नेत्ररोग में लाभ, रक्त विकार व शरीर दौर्बल्यादि से मुक्ति मिलती है।

विशेष- मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक एवं धनु राषि वालों को व इन्हीं लग्न में उत्पन्न व्यक्तियों को माणिक्य धारण करना शुभप्रद व लाभदायक रहता है, जिनकी कुण्डली में या चंद्र कुण्डली में सूर्य प्रभावी ना हो रहा हो तो उन्हें भी माणिक्य धारण करना शुभप्रद रहता है। तँत्राचार्य भार्गव दवे

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