श्रीश्री बगलामुखी सर्वतन्त्रसाधना ज्योतिष

बगला प्रत्यंगिरा एवं अन्य प्रत्यंगिरा प्रयोग

जानें #बगलाप्रत्यंगिरा अथवा कोई भी प्रत्यंगिरा का प्रयोग कबओर किस परिस्थिति में करना चाहिए ,
करना भी चाहिए अथवा नहीं एवं कौन योग्य हे व कौन अयोग्य,
सर्व प्रथम यह जानते हे की यह प्रयोग क्यूँ व किस अवस्था में किस प्रकार किया जाए इसका अभिप्राय क्या हे ,

प्रत्यंगिरा का प्रयोग #कृत्यानिवारण हेतु विशेषतः प्रभावी होता हे , #श्रीप्रत्यंगिरा समस्त कृत्याओं की #अधिष्ठात्री हे,
प्रायः अधिकांश देवियों की होति हे ,
महादेवियों का #क्रुद्धरौद्ररूप हि विभाजित होकर प्रत्यंगिरा स्वरूप में पूजित होकर भक्तार्थ रक्षात्मक व रिपुणार्थ प्रहारात्मक प्रकट हुआ ,
तन्त्रग्रंथों में #महाप्रत्यंगिरा को संसार की अद्वितीय समग्र शक्तिस्वामि भगवान #श्री_श्री_शरभेश्वर की जिह्वा कहा गया हे ,
जिन्हें #गुरुसेवा (गुरुकुलवास) का लाभप्राप्त न हुआ हो व केवल ग्रन्थों का अध्ययन किया हो उन्हें अनुभूत ज्ञान प्राप्त नहि हो पाता , पुस्तक नि:संदेह ज्ञानप्रवीण बना देती हे परंतु उनका प्रयोग विधि अनुभव कर्तव्यऽकर्तव्य बोध तो केवल गुरुगंगा के स्त्रोत गंगोत्री स्वरूप श्रीगुरुदेव के आश्रय द्वारा हि सम्भव हो पाता हे ,
अभिप्राय यह हे की अभिकांशत: कई एसे व्यक्ति हें जो केवल पुस्तकों के द्वारा हि मार्गदर्शन करने लगे हे , दीक्षादान को व्यापार व पुस्तकीय आधार पर शिष्य को साधनाएँ प्रदान करने लगे हैं कोई भी साधना का स्वयं को किंचित् मात्र भी अनुभव न होने पर भी स्वशिष्यों को एकांत आदी में जपार्थ प्रेषित कर देते हैं जो की अनुचित हि हे ,
हर किसी के प्रभाव में आजाने का कारण हमारे ज्ञान का अभाव हि होता हे ।
शास्त्र ग्रंथादि का पठन अवश्य करना चाहिए तर्कशान्ति व ज्ञानवर्धन हेतु अतिआवश्यक हे , किन्तु कोई भी प्रयोग व साधना सदा हि सद्गुरूदेव के संरक्षण में व योग्य होने पर भी आज्ञा लेकर हि करें ,

अब हम केवल प्रत्यंगिरा के विषय में उल्लेख करते हे ,

अवहड़कादि चक्र द्वारा मित्र,सम,शत्रु आदि का भलीभाँति निर्णय करें शत्रु आने पर कदापि प्रयोग न करें , मित्र अथवा सम होने पर हि यह प्रयोग कालगणना मुहूर्त का भलिभाँतिविचार कर प्रयोग प्रारम्भ करें ,

प्रत्यंगिरा प्रयोग हेतु सर्वप्रथम #गुरु_गणेश_शारदा_ईष्ट का ध्यान,आह्वाहन,आसन निवेदित कर यथोचित पूजन कर तंत्राऽध्यक्ष शिवशक्ति स्वरूप भगवान #श्रीवीरभद्र_काली का अवश्य ध्यान कर रक्षा हेतु निवेदन करें ,
शुद्धिकरण,आचमन,पवित्रिधारण,शिखाबंधन,प्राणायाम,
दिग्बंधन आदि का विशेषतः ध्यान रखें ,
तत्पश्चात् गुरुमंत्र की कम से कम ५ माला जप अवश्य करें जिससे की गुरुतत्व कार्यसिद्धी में सहायक हो जाएँ ,

यह प्रयोग भिन्न भिन्न प्रकार से किए जाते है ,
विधि गुरुगम्य होने के कारण पूर्ण रूप से प्रकाशित न करने को बाध्य हूँ , कार्य अनुसार विधि अपने सद्गुरू से प्राप्त करें,

ज्ञात हो प्रत्यंगिरा परंघातक वज्र की भाँति घातक भी हे ,
महारक्षक ढाल भी , पूर्णविचार द्वारा हि परिस्थिति अनुसार प्रयोग को करना चाहिए,

#योग्य वहि हे जो गुण व दोष को जानें व #गुरु के चरणों में प्रीति रखता हो , प्रयोगादि में अनुभवी हो ,
अन्यथा #अयोग्यता सदा हि #घातक सिद्ध होती हे ।।

।। अथ श्री बगलाप्रत्यंगिरा स्तोत्र ।।
विनियोग : – अस्य श्री बगला प्रत्यंगिरा मंत्रस्य नारद ऋषि स्त्रिष्टुप छन्दः प्रत्यंगिरावल्गा देवता ह्लीं बीजं हूं शक्तिः ह्रीं कीलकं ह्लीं ह्लीं ह्लीं ह्लीं प्रत्यंगिरे
मम सर्वान् विनाशार्थे (पर कृत्यां निवरणार्थे) जपे च पाठे विनियोगः ।

मंत्र : ॐ प्रत्यंगिरायै नमः प्रत्यंगिरे सकल कामान् साधय साधय मम रक्षां कुरू कुरू सर्वान शत्रुन् खादय-खादय, मारय-मारय, घातय-घातय ॐ ह्रीं फट् स्वाहा।

बगला प्रत्यंगिरा कवच —

ॐ भ्रामरी स्तम्भिनी देवी , क्षोभिणी मोहनी तथा ।

संहारिणी द्राविणी च , जृम्भिणी रौद्ररूपिणी ।।

इत्यष्टौ शक्तयो: देवि , शत्रु पक्षे नियोजताः ।

धारयेत कण्ठदेशे च , सर्व शत्रु विनाशिनी ।।

ॐ ह्रीं भ्रामरीं सर्व शत्रून् भ्रामय भ्रामय ॐ ह्रीं स्वाहा ।

ॐ ह्रीं स्तम्भिनीं मम शत्रून् स्तम्भय स्तम्भय ॐ ह्रीं स्वाहा ।

ॐ ह्रीं क्षोभिणिं मम शत्रून् क्षोभय क्षोभय ॐ ह्रीं स्वाहा ।

ॐ ह्रीं मोहिनीं मम शत्रून् मोहय मोहय ॐ ह्रीं स्वाहा ।

ॐ ह्रीं संहारिणीं मम शत्रून् संहारय संहारय ॐ ह्रीं स्वाहा ।

ॐ ह्रीं द्राविणीं मम शत्रून् द्रावय द्रावय ॐ ह्रीं स्वाहा ।

ॐ ह्रीं ज्रम्भिणीं मम शत्रून् जृम्भय जृम्भय ॐ ह्रीं स्वाहा ।

ॐ ह्रीं रौद्रीं मम शत्रून् सन्तापय सन्तापय ॐ ह्रीं स्वाहा ।

!! इति श्री रूद्रयामले शिवपार्वति (आनंदभैरव_आनंदभैरवी) सम्वादे बगला प्रत्यंगिरा कवचम् संपूर्णम् !!

#जयति_ब्रह्मास्त्रविद्या:__

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