श्रीश्री बगलामुखी सर्वतन्त्रसाधना ज्योतिष

रावण खडग साधना

रावण की साधना
रावण स्व्यम एक महान तांत्रिक ओर उदारवादी राजा था उसके राज्य मैं प्रजा सबसे अधिक स्मृध थी ,,पूरी लंका ही सोने की बनी थी उसी से वहा के निवासियों की प्र्भुतता का अनुमान किया जा सकता है । तंत्र मंत्र के स्वामी रावण ने अपने खुद को प्रसन्न कर रावण की विशेष कृपा (यश वेभव ,सिद्धि प्राप्ति ) के लिये
"क्रियोड्डीश तंत्रम"
मैं ये मंत्र लिखा है कहा जाता है की इस मंत्र के जाप से पृथ्वी के सबसे ताकतवर तांत्रिक रावण प्रसन्न हो जाते है ।

" लां लां लां लंकाधिपतये लीं लीं लीं लंकेशं लूं लूं लूं लोल जिह्वां, शीघ्रं आगच्छ आगच्छ चंद्रहास खङेन मम शत्रुन विदारय विदारय मारय मारय काटय काटय हूं फ़ट स्वाहा "
सावधान
यह एक अति उग्र मंत्र है.
कमजोर दिल वाले तथा बच्चे और महिलायें इस मंत्र को न करें.
अपने गुरु से अनुमति लेकर ही इस साधना को करें.
साधना काल में भयानक अनुभव हो सकते हैं.
दक्षिण दिशा में देखते हुए दोनों हाथ ऊपर उठाकर जाप करना है.
२१००० मंत्र जाप रात्रि काल में करें.
२१०० मंत्र से हवन करें.
बिना डरे जाप पूर्ण करें.
दशानन रावण की कृपा प्राप्ति होगी.
जय माँ
तंत्राचार्य भार्गव दवे
9825584359

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