श्रीश्री बगलामुखी सर्वतन्त्रसाधना ज्योतिष

ज्योतिष

  • भोमअश्विनी सिद्ध योग

    नूतनायां प्रतिमायां जप्त्वा देवतासांनिध्यं भवति । प्राणप्रतिष्ठायां जप्त्वा प्राणानां प्रतिष्ठा भवति । भौमाश्विन्यां महादेवीसंनिधौ जप्त्वा महामृत्युं तरति । स महामृत्युं तरति य एवं वेद । इत्युपनिषत् ।। -----///-/////////---------------///// "भोमा अश्विनी योग " (मंगलवार को अश्विनी नक्षत्र ) का संयोग हो रहा है। इसे "अमृत सिद्धि योग "भी कहा जाता है । "दुर्गा सप्तशती "के "देवी अथर्वशीर्ष "का पाठ अवश्य कीजिये । आपके पास नूतन देवी मूर्ति या प्रतिमा या चरण पादुका हो तो उन देवी स्वरूप पर 10 देवी अथर्वशीर्ष का पाठ करके ऐक पाठ से अभिषेक करें,रोगी को उस जल का पान करावे शतमष्टोत्तरं चास्य पुरश्चर्याविधिः स्मृतः। दशवारं पठेद् यस्तु सद्यः पापैः प्रमुच्यते । महादुर्गाणि तरति महादेव्याः प्रसादतः ।। श्रीश्री बगलामुखी सर्वतन्त्रसाधना ज्योतिष 9328211011 भार्गव दवे ...

  • નવગ્રહ પરિચય

    નવગ્રહ નો પરિચય સૂર્ય સૂર્ય (દેવનાગરી: सूर्य, સૂર્ય (sūrya)) મુખ્ય ગ્રહ છે, સૌર દેવતા, આદિત્યોમાંના એક, કશ્યપ અને તેમની એક પત્નીઓ અદિતીના પુત્ર, [૮]ના ઇન્દ્ર અથવા દ્યઉસ પિટર (જે વિવિધ સંસ્કરણો પર આધારિત). તેમના વાળ અને હાથ સોનાના છે. તેમનો રથ સાત ઘોડાઓ દ્વારા ખેંચવામાં આવે છે, જે સાત ચક્રોનું પ્રતિનિધિત્વ કરે છે. તેઓ રવિના રૂપમાં "રવિ વાર"ના સ્વામી છે. હિંદુ ધાર્મિક સાહિત્યમાં, સૂર્યને વિશિષ્ટ રીતે ભગવાનના દ્રશ્ય સ્વરૂપમાં દર્શાવવામાં આવ્યો છે, જેને રોજ જોઈ શકાય છે. વધુમાં શૈવપંથીઓ અને વૈષ્ણવો સૂર્યને અનુક્રમે શિવ અને વિષ્ણુના એક સ્વરૂપ તરીકે માને છે. દાખલા તરીકે, વૈષ્ણવો સૂર્યને સૂર્ય નારાયણ કહે છે. શૈવ શાસ્ત્રોમાં, સૂર્યને અષ્ટમૂર્તિ ...

  • राहु-केतु का फलित सिद्धात

    राहु-केतु का फलित सिद्धात और केतु दोनों छाया- ग्रह हैं। इनका अपना कोई अस्तित्व नहीं है। ये दोनों जिस भाव में स्थित हों या जिस भावेश के साथ हों उनका फल प्रबल रूप से करते हैं। पराशरी के अनुसार राहु या केतु जिस भाव में जिस ग्रह के साथ होगा उसी के अनुरूप फल देगा। राहु और केतु के ग्रहों के साथ सहायक संबंध को ही सभी विद्वानों ने एकमत से स्वीकार किया है। लेकिन ये दोनों ग्रह सूर्य और चंद्र के साथ होने पर उनके फलों में मात्र अड़चन पैदा करते हैं, उनमें वृद्धि नहीं होती। जब ये भाव 3,6 या 12 में होते हैं, तभी फलों की वृद्धि करते ...

  • अशुभ सूर्य विधान

    जय माँ यदि किसी जातक की कुण्डली में सूर्य अशुभ हो तो उसको सूर्य के बीज मंत्र का कम से कम 31,000 की संख्या में जप करना चाहिए। जप प्रारंभ शुक्ल पक्ष में शुभ मुहूर्त में सूर्योदय से प्रारंभ करना चाहिए । जाप करते समय अपने पास ताम्र के पात्र में शुद्ध जल, चावल, लाल चंदन, लाल कनेर का पुष्प गंगाजल व गुड़ डालकर पात्र को लाल वस्त्र व आम के पत्तों से ढक लेना चाहिए साथ ही सूर्य के निमित्त दान वस्तुओं को पास में रख लेना चाहिए। सूर्य का बीज मंत्र - ॐ हृां हृौं सः सूर्याय गेहूँ, लालचंदन, गुड़, लालपुष्प, ...

  • बुध के बारह भाव मे फल

    प्रथम भाव में बुध :- पीली आभा लिये चेहरा होता है,लम्बी उम्र का मालिक होता है,गणित और गणना करने वाले विषयों में प्रवीणता होती है,मजाकिया स्वभाव होता है यानी हर बात को मजाकिया लहजे में कहना,धर्म के कार्यों में रुचि होती है। २. दूसरे भाव में बुध :- अच्छे कार्य करने में रुचि होती है,हिम्मत बहुत होती है,बुद्धि से तेज होता है,मेहनत भी खूब करता है,वकील या नेता जैसे गुण होते है बात की बात में धन होता है,दलाली और शेयर बाजार वाले कामो में रुचि होती है। ३. तीसरे भाव में बुध :- लेखनी का पक्का होता है,कम्पयूटर और इसी प्रकार के यंत्रों को ...

  • ज्योतिष

    ज्‍योतिष विषय वेदों जितना ही प्राचीन है। प्राचीन काल में ग्रह, नक्षत्र और अन्‍य खगोलीय पिण्‍डों का अध्‍ययन करने के विषय को ही ज्‍योतिष कहा गया था। इसके गणित भाग के बारे में तो बहुत स्‍पष्‍टता से कहा जा सकता है कि इसके बारे में वेदों में स्‍पष्‍ट गणनाएं दी हुई हैं। फलित भाग के बारे में बहुत बाद में जानकारी मिलती है। भारतीय आचार्यों द्वारा रचित ज्योतिष की पाण्डुलिपियों की संख्या एक लाख से भी अधिक है।[1] 'ज्योतिष' से निम्नलिखित का बोध हो सकता है- वेदांग ज्योतिष सिद्धान्त ज्योतिष या 'गणित ज्योतिष' (Theoretical astronomy) फलित ज्योतिष (Astrology) अंक ज्योतिष (numerology) खगोल शास्त्र (Astronomy) ...

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