श्रीश्री बगलामुखी सर्वतन्त्रसाधना ज्योतिष

मन्त्र तन्त्र यन्त्र साधनाऐ

  • महाविद्या छिन्नमस्ता प्रयोग

    महाविद्या छिन्नमस्ता प्रयोग शोक ताप संताप होंगे छिन्न-भिन्न जीवन के परम सत्य की होगी प्राप्ति संसार का हर्रेक सुख आपकी मुट्ठी में होगा अपार सफलताओं के शिखर पर जा पहुंचेंगे आप जीवन मरण दोनों से हो जायेंगे पार "महाविद्या छिन्नमस्ता" एक बार देवी पार्वती हिमालय भ्रमण कर रही थी उनके साथ उनकी दो सहचरियां जया और विजया भी थीं, हिमालय पर भ्रमण करते हुये वे हिमालय से दूर आ निकली, मार्ग में सुनदर मन्दाकिनी नदी कल कल करती हुई बह रही थी, जिसका साफ स्वच्छ जल दिखने पर देवी पार्वती के मन में स्नान की इच्छा हुई, उनहोंने जया विजया को अपनी मनशा बताती व उनको भी ...

  • शीघ्र विवाह हेतु गणेश साधना

    जिस व्यक्ति का विवाह में विघ्न आते है । विवाह की बात होती है और आकस्मिक कैंसल हो जाती है ।या तो कुंडली मे मंगल दोष है वे लोग ये साधना अवश्य करे।साधना सात्विक ओर बहोत सरल है प्रथम पीतल की गणेश की मूर्ति ले और लाल आसन पर गेहूं का स्वस्तिक बनके पीपल के पान पर (गं) बीज को चन्दन केसर से लिखे ओर इस पान पर रिद्धि शिद्ध के साथ गणेश जी की स्थापना करें लाल आसान मूंग की माला लाल गोमुखी ओर पूर्व दिशा के सामने मुँह रखे जप सुरु करे और गाय के ...

  • मूंगा गणेश साधना

    श्री मूंगा गणेश मन्त्र साधना ये साधना से शीघ्रहि विवाह,धन प्राप्ति,ऋणमुक्ति,मंगल दोष निवारण होता है,गणेश जी की साधना से विघ्नों स्वप्न में भी नही आते है जिस जातक विवाह नही हो रहाहै वो ये साधना अवश्य करे, जिसके विवाह होगया है और पति-पत्नी में प्रेम नही है और मतभेद रहते है वो भी ये साधना करे, आप भागीदारी में वेपार कर रहे और अपने साथी के साथ मतभेद होते है,वो लोग भी ये साधना जरूर करे, जिस व्यक्ति को कर्जा है वोलोग ये साधना अवश्य करे, जिस स्त्री को मासिकधर्म की समश्या है और जिस पुरुष को रक्त की कमी है या तो ...

  • महासरस्वती साधना

    महासरस्वती मन्त्र साधना सभी माई भक्तो को वसंत पँचमी की शुभकामनाएं माँ सरस्वती की साधना से वाणी में दिव्यता शुद्धिकरण एवं ज्ञान की प्रप्ति होती है जो व्यक्ति कलाकार ,गायक,नेता, लेखक है उसे ये साधना जरूर करनी चाहिये जिस जातक को बोल ने में दिक्कत होती है या तो बालक दो साल का होगया हो बोलना ना शिखा हो तो ये साधना अवश्य करे और माँ की कृपा से शिद्ध अवश्य मिलिगी ध्यान-या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा मन्त्र-ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वीणा पुस्तक धारिणीम् मम् भय निवारय निवारय अभयम् देहि देहि ...

  • दत्तात्रेय तंत्र वशीकरण प्रयोग –

    दत्तात्रेय तंत्र वशीकरण प्रयोग – किसी भी बुधवार की रात को पीले वस्त्र पहनकर पीले रंग के आसन पर बैठें और आपका मुख उत्तर या पूर्व दिशा में होना चाहिए। अपने सामने एक चैकी पर पीला वस्त्र बिछाकर उस पर दत्तात्रेय यंत्र रखें और उस पर सिंदूर रखें। घी का एक दीपक जलाएँ और मूल मंत्र का रुद्राक्ष माला से 11 माला का जप करें। जप के पूरा होने पर सिंदूर को एक चाँदी की डिबिया में संभालकर रख लें। अब जब भी आपको किसी व्यक्ति को अपनी बात मनवानी हो या कोई काम करवाना हो, तो मंत्र का 11 बार ...

  • बलिदान का अर्थ

    बलिदान बलिदान को प्रमुख उपचार माना गया है जो अपने इष्टदेव की पूजा-अर्चना के कुल सोलह उपचारमे से एक है । ऐसी मान्यता है कि पूजा की समाप्ति पर यदि आराधक या साधक ने पशु बलिदान नहीं दिया तो पूजा निष्फल सिद्ध होगी, मनचाहा फल नही मिलता । बलिदान का बडा व्यापक अर्थ है । वेदों में बलिदान के महत्त्व पर बल दिया गया है । किंतु कालांतर में न जाने कैसे बलिदान का अर्थ संकुचित हो गया । यह दिग्भ्रमित धारणा जड पकड गई कि पशुबलि के बिना आराधक की आराधना अधूरी है । ऐसा कैसे संभव हो सकता है कि ...

  • वीर साधना

    वीर साधना सदा से साधको के मध्य प्रचलित रही है। वीर कई प्रकार के होते है।उनमे से ही एक है महाकाली वीर।इस वीर की उत्पत्ति महाकाली से ही होती है तथा ये उन्ही में विलीन हो जाता है।ये कई कार्य संपन्न कर सकता है जैसे साधक को सुरक्षा प्रदान करना,कई प्रकार की जानकारी लाकर देना,कई गोपनीय साधनाओ के विषय में बताना आदि सभी कार्य कर सकता है जो साधक आदेश देता है।वास्तव में इस वीर की अपनी कोई शक्ति नहीं होती है।ये महाकाली से शक्ति प्राप्त करता है,अतः इससे कभी कोई अनेतिक कार्य नहीं करवाया जा सकता है अन्यथा ये साधक को छोड़कर पुनः महाकाली में समां जाता है,और दुबारा कभी सिद्ध ...

  • चारो गुप्त नवरात्रि महात्म्य

    आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से नवमी के बीच के काल को गुप्त नवरात्रि कहा गया है। आश्विन और चैत्र के बीच माघ शुक्ल प्रतिपदा भी गुप्त नवरात्रि होती है। गुप्त नवरात्रि विशेष तौर पर गुप्त सिद्धियां पाने का समय रहता है। इस वर्ष गुप्त नवरात्रि 17 जुलाई से 25 जुलाई तक रहेगी। माघ मास अमूमन जनवरी और फरवरी के महीने को कहा जाता है। अगली माघ गुप्त नवरात्रि 9 फरवरी से लेकर 17 फरवरी तक रहेगी। देवी भागवत के अनुसार जिस तरह वर्ष में चार बार नवरात्र आते हैं और जिस प्रकार नवरात्रि में देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की ...

  • श्रीश्री सद्गुरु भगवान पादुका पूजन

    श्रीश्री गुरुदेवता पादुका पूजन ब्रह्म-मुहूर्त में निद्रा त्यागकर, शौच, दंतधावन, स्नान इत्यादि से निवृत्त होकर शुद्ध वस्त्र पहनें। चन्द वाले अक्षत से केसरी स्थापन पर अष्टदल, बनाके उस पर गुरु पादुकां स्थापन करे जिस कक्ष में गुरु पादुका स्थापित हो (अथवा पादुका का पूजन करना हो) उस कक्ष में प्रवेश के पूर्व प्रवेश द्वार पर निम्न तीन मंत्रों से पृथक-पृथक द्वार देवता को प्रणाम करें- (1) द्वार देवता प्रणाम- दाहिने भाग पर - ऊँ ऐं ह्रीं श्रीं भद्रकाल्यै नमः बाएँ भाग पर - ॐ ऐं ह्रीं श्रीं भैरवाय नमः उर्ध्व भाग पर - ॐ ऐं ह्रीं श्रीं लम्बोदराय नम: ( द्वार देवताओं को प्रणाम करने के पश्चात ...

  • श्रीबगलामुखी_रहस्यात्मक_वर्णन

    #श्रीबगलामुखी_रहस्यात्मक_वर्णन....... \_______,,\!/,,_______/ ||श्रीगुरुगणेभ्यो_नम: || ——<><><><><><><><><><><><><><>—— •||• ध्यानं •||• या माता रविकोटिकोटि-सदृषा- -स्फुट्याज्जगद्विग्रहाम् । हस्तै:र्दीपकपाशमंकुशवराम् ...

  • महाविद्या नीलसरस्वती माँतारा

    द्वितीय_महाविद्या_महातारिणी_नीलसरस्वती_माँ_तारा.... श्रीगुरुगणेभ्यो_नम: । ।। अथ ध्यानं ।। नीलवर्णाम् त्रिनयनां , शवाऽसनसमायुताम् । बिभ्रतीं विविधां भूषा , मर्धेन्दु शेखरां वराम् ।। भावार्थ:— भगवती नीलवर्णा (नीलेरंग वाली ) त्रिनेत्रधारिणी, शवासन पर स्थित, पृथक्-पृथक् स्वरूप धारण कर भक्तों का उद्धार करने वाली, मस्तक पर अर्धचन्द्र धारण चंद्र को तेज प्रदान सुशोभित करने वाली, वरदायिनी श्री महाविद्यातारा की मैं शरण ग्रहण करता हूँ । अकारण करुणा वरुणालया माँ भगवती द्वितीय महाविद्या श्रीनील सरस्वती तारिणी तारा अनन्तशक्ति की स्वामिनी अनेक रूप धारण कर स्वभक्तों को भोग-मोक्ष प्रदान करती हैं ...

  • उच्छिष्ट_गणपति_प्रयोग_विधि_एवं_माहात्म्य

    #उच्छिष्ट_गणपति_प्रयोग_विधि_एवं_माहात्म्य #श्री_गुरुगणेभ्यो_नम: । आज का विषय अत्यन्त गूढ़ व समस्त सांसारिकों हेतु शुभकर जानते हैं #श्रीगणेश के अन्यस्वरूप #श्रीउच्छिष्ट_गणपति के अद्भुत प्रयोग व विधीवर्णन जो सर्वसुखकर हैं...... सर्वप्रथम वन्दना #श्रीउच्छिष्ट_गणपति का वन्दन करें । । वन्दना ।। उच्छिष्टंघोररूपं सतत भयहरं दीर्घदेहं सुनित्यं , घं घं घं घर्घर:स्त्वं अकुलकुलकरं राजतन्त्र:स्वरुपं । क्लीं क्लीं क्लीं क्लिष्टघोषं वर वर वरदं देवदेवंप्रधानं , उत्पल्लोत्पट्टपट्टंलिखिलिखिलिखितंल्लेखितंहस्तिमंत्रं ।। अर्थ:— भयंकर विशालदेह स्वरूप धारण कर समस्त ...

  • ब्रह्मास्त्रविद्या प्रयोग

    ब्रह्मास्त्र विद्या प्रयोग :- सृष्टि के आदि काल से ही हंसना, रोना, इच्छायें और उनकी पूर्ती में आने वाली बाधायें मनुष्य के लिये चुनौती रहे हैं | कोई धन पाना चाहता है तो कोई मान - सम्मान पाने के लिये परेशान है | किसी को प्रेम चाहिये तो कोई व्यर्थ में ही ईर्ष्या की अग्नि में झुलसा जा रहा है | कोई भोग में अपनी तृप्ति ढूंढ़ता रहा है तो कोई मोक्ष की तलाश में रहा है आगमोक्त विधान के अनुसार | अलग - अलग कामनाओं की पूर्ती के लिये दस महाविद्याओं की साधना की जाती रही है. काली, तारा, षोडषी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, ...

  • बगला प्रत्यंगिरा एवं अन्य प्रत्यंगिरा प्रयोग

    जानें #बगलाप्रत्यंगिरा अथवा कोई भी प्रत्यंगिरा का प्रयोग कबओर किस परिस्थिति में करना चाहिए , करना भी चाहिए अथवा नहीं एवं कौन योग्य हे व कौन अयोग्य, सर्व प्रथम यह जानते हे की यह प्रयोग क्यूँ व किस अवस्था में किस प्रकार किया जाए इसका अभिप्राय क्या हे , प्रत्यंगिरा का प्रयोग #कृत्यानिवारण हेतु विशेषतः प्रभावी होता हे , #श्रीप्रत्यंगिरा समस्त कृत्याओं की #अधिष्ठात्री हे, प्रायः अधिकांश देवियों की होति हे , महादेवियों का #क्रुद्धरौद्ररूप हि विभाजित होकर प्रत्यंगिरा स्वरूप में पूजित होकर भक्तार्थ रक्षात्मक व रिपुणार्थ प्रहारात्मक प्रकट हुआ , तन्त्रग्रंथों में #महाप्रत्यंगिरा को संसार की अद्वितीय समग्र शक्तिस्वामि भगवान #श्री_श्री_शरभेश्वर की ...

  • लक्ष्मी प्राप्ति प्रयोग

    लक्ष्मी जी को प्रश्न करने के उपाय.... माता लक्ष्मी जी को प्रश्न करने के लिऐ पीपल के वृक्ष के मूल में ऐक साल तक प्रत्येक एकादशी के दिन पंचामृत,धी का दीपक ,जनेऊ,मखन का भोग,पंचोपचार पूजन करके पीपल चार प्रदीक्षाना करके ऐक पीपल का पर्ण लेके उस पर ॐ नमो भगवते वासुदेवाय इस मंत्र को लिखे कुमकुम से ओर अगली एकादशी के दिन उसे पीपल के वृक्ष पास रख दे इस तरह करने से लक्ष्मी जी प्रश्न होंगे और अपने घर निरन्तर निवास करेगे जय माँ जय महाकाल श्री सदगुरू शरणम मम अधिक जनकारी के लिए सपंर्क करे श्रीश्री बगलामुखी सर्वतन्त्रसाधना ज्योतिष mo-9328211011 निःशुल्क जानकारी ...

  • परी साधना

    बहुत कहानियाँ सुनी होंगी बचपन में परियों की , मगर कभी सोचा है अगर उनसे मुलाकात हो जाये तो क्या रोमांच होगा ! बहुत ही लाजवाब साधनाएं हैं , जो आपको उस तत्व को समझने का मौका देती हैं ! संसार में हमेशा इन्सान सच्चे प्रेम के लिए भटका है ! मगर उसे सिवाए छल के कुछ नहीं मिलता ! घर का माहौल भी कलेश के कारण और जरूरी वस्तुओं की कमी के कारण खराब होता है तो मन इस संसार से उच्चाटित होना स्वाभाविक है ! तो इन्सान देव शरण का आसरा लेता है मगर किसी भी तत्व को जानने और समझने के लिए आपकी आवश्यकताओं की पूर्ति होनी जरुरी है और ...

  • तंत्रपर्द्धति से साधना का महत्व

    तन्त्रपद्धति से साधना का महत्व। तंत्र! अलौकिक शक्तियों से युक्त तथा सार्वभौमिक ज्ञान से सम्बद्ध, एक प्रकार विद्या प्राप्ति की पद्धति हैं, जो महान ज्ञान का भंडार हैं। आदि काल से ही समस्त हिन्दू शास्त्र! महान ज्ञान तथा दर्शन का भंडार रहा हैं तथा पांडुलिपि के रूप में लिपि-बद्ध हैं एवं स्वतंत्र ज्ञान के श्रोत हैं। बहुत से ग्रंथों की पाण्डुलिपि प्रायः लुप्त हो चुकी हैं या जीर्ण अवस्था में हैं। बहुत से ग्रंथों में कुछ ऐसे ग्रंथों का नाम प्राप्त होता हैं, जो आज लुप्त हो चुके हैं। तंत्र का शाब्दिक अर्थ। तंत्र का सर्वप्रथम अर्थ ऋग्-वेद से प्राप्त होता हैं, जिसके ...

  • महाविद्या कमला

    महाविद्या कमला धन तथा समृद्धि दात्री, दिव्य एवं मनोहर स्वरूप से संपन्न, पवित्रता और स्वछता से सम्बंधित "देवी कमला"। देवी कमला या कमलात्मिका, दस महाविद्याओं में दसवें स्थान पर अवस्थित तथा कमल या पद्म पुष्प के समान दिव्यता की प्रतीक हैं। देवी कमला, तांत्रिक लक्ष्मी के नाम से भी जानी जाती हैं, देवी का सम्बन्ध सम्पन्नता, सुख, समृद्धि, सौभाग्य और वंश विस्तार से हैं। दस महाविद्याओं की श्रेणी में देवी कमला अंतिम स्थान पर अवस्थित हैं। देवी सत्व गुण से सम्बद्ध हैं, धन तथा सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं। स्वच्छता, पवित्रता, निर्मलता देवी को अति प्रिय हैं तथा देवी ऐसे स्थानों में ही वास ...

  • महाविद्या भुवनेश्वरी

    महाविद्या भुवनेश्वरी देवी भुवनेश्वरी, दस महाविद्याओं में चौंथीं महा-शक्ति, तीनों लोकों या त्रि-भुवन (स्वर्ग, विश्व, पाताल) की ईश्वरी। सम्पूर्ण जगत या तीनों लोकों की ईश्वरी देवी भुवनेश्वरी नाम की महा-शक्ति हैं तथा महाविद्याओं में इन्हें चौथा स्थान प्राप्त हैं। अपने नाम के अनुसार देवी त्रि-भुवन या तीनों लोकों के ईश्वरी या स्वामिनी हैं, देवी साक्षात सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को धारण करती हैं। सम्पूर्ण जगत के पालन पोषण का दाईत्व इन्हीं 'भुवनेश्वरी देवी' पर हैं, परिणामस्वरूप ये जगन-माता तथा जगत-धात्री के नाम से भी विख्यात हैं। पंच तत्व १. आकाश, २. वायु ३. पृथ्वी ४. अग्नि ५. जल, जिनसे इस सम्पूर्ण चराचर जगत के ...

  • माँ नर्मदा साधना

    माँ नर्मदा साधना माँ नर्मदा की कृपा पाने के लिए भगवान शिव की पूजा का विशेष ।महत्व शिव की साधना से माँ शीघ्र प्रशन्न होती हे जेसे की नर्मदा तट पे मिटी के शिव लिङ्ग बनाके पूजा करे ,रुद्र अभषेक ,मृत्युंजय मन्त्र जप,कहा जाता हे की माँ के जहा उतार दक्षिण प्रवाह होता वहाँ तंत्र साधना शीघ्र फलदायी होती हे,बहोत दूर दूर से साधक साधना करने के लिए गुजरात में मांगरोल राजपिपला माँ के तट पे आते हे ।माँ नर्मदा के दर्शन मात्र से सब पाप धूल जाते हे।' ...

  • श्री ब्रह्मास्त्रविद्या साधना

    माँ बगुलामुखी साधना व् प्रयोग बगला मुखी .पीताम्बरा आदि नामो से प्रचलित है देबी भगवती बगलामुखी को स्तम्भन की देवी कहा गया है। स्तम्भनकारिणी शक्ति नाम रूप से व्यक्त एवं अव्यक्त सभी पदार्थो की स्थिति का आधार पृथ्वी के रूप में शक्ति ही है, और बगलामुखी उसी स्तम्भन शक्ति की अधिस्ठात्री देवी हैं। इसी स्तम्भन शक्ति से ही सूर्यमण्डल स्थित है, सभी लोक इसी शक्ति के प्रभाव से ही स्तंभित है। अतः साधक गण को चाहिये कि ऐसी महाविद्या कि साधना सही रीति व विधानपूर्वक ही करें। अब हम साधकगण को इस महाविद्या के विषय में कुछ और जानकारी देना ...

  • लक्ष्योत्मा साधना

    लक्ष्योत्मा साधना ये साधना से अतूट धन वर्षा होगी आर्थिक समस्या खत्म हो जायेगी ,साधना आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा प्राप्त है साधना बहुत ही सरल है साधना से सभी आर्थिक समश्याओ का हल हो जायेगा साधना विधि- रविवार,शुक्रवार या तो पूर्णिमा के दिन शुरुआत कर सकते हो रात्रि 10 बजे को ऐक लाल स्थापन पर श्रीयंत्र या तो अक्षत से त्रिकोण बनाके "श्रीं" बीज बनाके लाल आसान कमलगट्टे की माल लाल या स्वेत धोती धारण करके गुरु पूजन गणेश पूजन संकल्प करके साधना सुरु करे साधना 11 दिन करनी है वोभी रात के समय मे ओर ...

  • अप्सरा साधना

    बहुत कहानियाँ सुनी होंगी बचपन में परियों की , मगर कभी सोचा है अगर उनसे मुलाकात हो जाये तो क्या रोमांच होगा ! बहुत ही लाजवाब साधनाएं हैं , जो आपको उस तत्व को समझने का मौका देती हैं ! संसार में हमेशा इन्सान सच्चे प्रेम के लिए भटका है ! मगर उसे सिवाए छल के कुछ नहीं मिलता ! घर का माहौल भी कलेश के कारण और जरूरी वस्तुओं की कमी के कारण खराब होता है तो मन इस संसार से उच्चाटित होना स्वाभाविक है ! तो इन्सान देव शरण का आसरा लेता है मगर किसी भी तत्व को जानने और समझने के लिए आपकी आवश्यकताओं की पूर्ति होनी जरुरी है और ...

  • श्री महाकाली वीर साधना

    वीर साधना सदा से साधको के मध्य प्रचलित रही है। वीर कई प्रकार के होते है।उनमे से ही एक है महाकाली वीर।इस वीर की उत्पत्ति महाकाली से ही होती है तथा ये उन्ही में विलीन हो जाता है।ये कई कार्य संपन्न कर सकता है जैसे साधक को सुरक्षा प्रदान करना,कई प्रकार की जानकारी लाकर देना,कई गोपनीय साधनाओ के विषय में बताना आदि सभी कार्य कर सकता है जो साधक आदेश देता है।वास्तव में इस वीर की अपनी कोई शक्ति नहीं होती है।ये महाकाली से शक्ति प्राप्त करता है,अतः इससे कभी कोई अनेतिक कार्य नहीं करवाया जा सकता है अन्यथा ये साधक को छोड़कर पुनः महाकाली में समां जाता है,और दुबारा कभी सिद्ध ...

  • द्वादश काली साधन

    द्वादश काली साधन यह सारी की सारी ब्रम्हान्ड मात्र एक अपार सक्रिय चेतना की प्रवाह है अर्थात इस अपार शक्ति की द्वादश काली की प्रतिक रूप मे तीस अंशो मे तथा इन्ही तीस अंशो को माह की रूप मे दर्शायी गयी है. इन्ही तीस अंशो की प्रथम प्रतिप्रदा से लेकर पूर्णमासी एवं फिर पूर्णमासी के बाद प्रतिप्रदा से अमावस्या तक तिथियो की फलस्वरूप तीस अंश की प्रत्येक अंश मे विभक्त की कियी गयी है। इस प्रकार हमारी पृथ्वी की यही तीस अंश मास की फलस्वरूप अंश रेखा कहलाती है। यही द्वादश काली प्रथम सृष्टि + स्थिति एवं संहार करती रहेती है। अर्थात प्रथम ...

  • कर्ज़ मुक्ति घुमवती प्रयोग

    कर्ज मुक्ति के लिए घुमावती देवी साधना करे कुंडली का बारहवें घर से मोक्ष, मृत्यु के बाद जातक का धन, विदेश में मृत्यु, विदेश यात्रायें, बैंक से ऋण या किसी भी प्रकार का लोन, व्यक्ति की शिक्षा पूरी होने के बाद का समय, पिता का भाई, बायीं आँख, नींद में कमी आदि का विचार किया जाता है | व्यक्ति की मजबूरी, परेशानी, चिंता और दयनीय स्थिति का कारण कुंडली का बारहवां घर ही होता है | यदि कोई व्यक्ति आपकी स्थिति का लाभ उठा कर स्वयं अच्छी स्थिति में आ जाए तो समझ लें कि बारहवें घर का असर है | परन्तु ...

  • रावण खडग साधना

    रावण की साधना रावण स्व्यम एक महान तांत्रिक ओर उदारवादी राजा था उसके राज्य मैं प्रजा सबसे अधिक स्मृध थी ,,पूरी लंका ही सोने की बनी थी उसी से वहा के निवासियों की प्र्भुतता का अनुमान किया जा सकता है । तंत्र मंत्र के स्वामी रावण ने अपने खुद को प्रसन्न कर रावण की विशेष कृपा (यश वेभव ,सिद्धि प्राप्ति ) के लिये "क्रियोड्डीश तंत्रम" मैं ये मंत्र लिखा है कहा जाता है की इस मंत्र के जाप से पृथ्वी के सबसे ताकतवर तांत्रिक रावण प्रसन्न हो जाते है । " लां लां लां लंकाधिपतये लीं लीं लीं लंकेशं लूं लूं लूं लोल जिह्वां, ...

  • श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र साधना

    वडवानल स्तोत्र ये स्तोत्र के जप करने से पर मन्त्र तंत्र का सेडान होता हे । कर्ज से मुक्ति मिलती हे ।ग्रह की शान्ति होती हे। जेल से या बंधन से मुक्ति मिलती हे। शत्रु का नाश होता हे। विधि, लाल आसान रुद्राक्ष माला लाल धोती सरशो का दीपक जलाये 1250 की संख्या में जप करे @जय माँ@ विनियोगः- ॐ अस्य श्री हनुमान् वडवानल- स्तोत्र-मन्त्रस्य श्रीरामचन्द्र ऋषिः, श्रीहनुमान् वडवानल देवता, ह्रां बीजम्, ह्रीं शक्तिं, सौं कीलकं, मम समस्त विघ्न-दोष-निवारणार्थे, सर्व- शत्रुक्षयार्थे सकल- राज- कुल- संमोहनार्थे, मम समस्त- रोग- प्रशमनार्थम् आयुरारोग्यैश्वर्याऽभिवृद्धयर्थं समस्त- पाप- क्षयार्थं श्रीसीतारामचन्द्र-प्रीत्यर्थं च हनुमद् वडवानल-स्तोत्र जपमहं करिष्ये । ध्यानः- मनोजवं मारुत-तुल्य-वेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठं । वातात्मजं वानर-यूथ-मुख्यं श्रीरामदूतम् शरणं प्रपद्ये ।। ॐ ...

  • विडालमुखी यक्षिणी साधना

    विडालमुखी यक्षिणी साधना जय माँ नर्मदा विदलमुखी यक्षिणी बगलामुखी देवी की साधना में शीघ्र सफलता प्राप्त करने के लिए करनी चाहिए विडालमुखी मन्त्र का 1 लाख जप करने से सिद्ध होती हे। कृष्ण पक्ष के शनिवार से सुरु करनी हे दूसरे शनिवार तक जप पूर्ण करना हे। दक्षिण दिशा पिला आसान रुद्राक्ष या हल्दी की माला तली का तेल का दीपक जलाना हे। ये साधना अपने गुरूजी के सानिध्य में करनी चाहिए बिना गुरु साधना खतरनाक हो सकती हे। मन्त्र भी अपने गुरु से प्राप्त करे अधिक जानकारी के लिए हमें कोल करे तंत्रचार्य भार्गव दवे राजकोट Mo.9825584359 ...

  • श्री दक्षिणमुख हनुमान साधना

    @श्री दक्षिणमुखी हनुमान साधना@ जय माँ जय महाकाल भगवंत रुद्रमुर्तीय हनुमान के नाम से ही सभी संकट नष्ट होजाता है, मगर मनोकामना की पूर्ति के लिऐ मन्त्र अलग अलग मन्त्र के प्रयोग होते है,दक्षिणमुख हनुमान जी के मंत्र से हमारे शरीर की रक्षा होती है और भूतपिशाच दूर रहते है, इस मन्त्र से मलिन जगहों पर यज्ञ करने से मलिन तत्व वो का नाश होता है।घर मे सुखः शान्ति की प्राप्ति होती है।और इस मन्त्र को दक्षिण कीओर मुख रखे जाप करने से राहु,शनि,केतु की भी शान्ति होती है। विधि- काल आसान,रुद्राक्ष की माला,सरसों के तेल का दीपक, दक्षिण दिशा ,समय मध्यरात्रि ओर मंत्र ...

  • श्री बहुधा देवी मन्त्र साधना

    श्री बहुधा देवी ओदवाह गौत्र की कुलदेवी है । बहुधा देवी के गणेश एकदंत है और उनके भैरव अशीतांग है उनके शिव सोमेश्वर(सोमनाथ )महादेव है ।कुलदेवी की साधना के पूर्व गुरु,गणेश,भैरव,शिव, के मन्त्र के अनुश्ठान जरूर करने चाहिये । कुलदेवी की साधना से घर मे सुखः शांति और संतति की प्राप्ति होती है । जिसे संतान नही है ।ये साधना जरूर करे इस मन्त्र से संतान अवश्य होता है इसमें संसय नही है । ये मन्त्र मेरे गुरु की प्रसादी है इसलिए में ये मन्त्र यहाँ लिखता नही हु ये मन्त्र गुप्त है । जिस साधक को ये मन्त्र चाहिए वो ...

  • जिन्न भगाने का उपाय

    जिन्न-जिन्नात को भगाने के तरीके । जय माँ जय गुरुदेव मेंरे गुरुदेव की आज्ञा है की कभी भी भूतो-प्रेत साधना नही करनी ऐसा आदेश है इसलिए में सिर्फ भूत-प्रेत को मोक्ष देने की ही कोशिस करता हु । जिस भी व्यक्ति में या कोई भी स्थान पर जिन का वास हो वो व्यक्ति पर गायत्रीमंत्र का अभिषेक कर ना चाहिये और जो स्थान पर उनका वास हो वो जगह पर उने आमंत्रित करके क्षेत्र बलि देकर ओर विद्वान पंडित के साथ मे साधक को लेकर वहां प्रेत बलि या साधक की आज्ञानुसार कर्म करवाएं इस कार्य से वो प्रेत के आशीर्वाद ओर उनको ...

  • तन्त्र

    तन्त्र, परम्परा से जुड़े हुए आगम ग्रन्थ हैं। तन्त्र शब्द के अर्थ बहुत विस्तृत हैं। यह एक हिन्दू एवं बौद्ध परम्परा है जिसका विकास प्रथम सहराब्दी के मध्य के आसपास हुआ। भारतीय परम्परा में किसी भी व्यवस्थित ग्रन्थ, सिद्धान्त, विधि, उपकरण, तकनीक या कार्यप्रणाली को भी तन्त्र कहते हैं।[1][2] तन्त्र-परम्परा हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म, जैन धर्म, सिख धर्म, तिब्बत की बोन परम्परा, दाओ-परम्परा तथा जापान की शिन्तो परम्परा में पायी जाती है। हिन्दू परम्परा में तन्त्र मुख्यतः शाक्त सम्प्रदाय से जुड़ा हुआ है, उसके बाद शैव सप्रदाय से, और कुछ सीमा में वैष्णव परम्परा से भी।[3]शैव परम्परा में तन्त्र ग्रन्थों के ...

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